शनि गोचर

संक्षेप में

शनि इस समय मीन राशि में (वक्री) 19°42'53" पर गोचर कर रहा है। यह ३ जून २०२७ को मेष में प्रवेश करेगा।

वर्तमान राशि
मीन
Degree
19°42'53"
Motion
वक्री
अगला राशि परिवर्तन
मेष · ३ जून २०२७

Saturn (Shani) transit is the slow, structural one — about two and a half years per sign — and the most consequential to track. It rewards patience and discipline and exposes what was built on shortcuts. Saturn’s movement relative to your Moon sign defines the seven-and-a-half-year Sade Sati and the Dhaiya periods.

आगामी गोचर

शनि मेष में प्रवेश३ जून २०२७
शनि मीन में प्रवेश२० अक्टू॰ २०२७
शनि मेष में प्रवेश२३ फ़र॰ २०२८

शनि गोचर का सभी 12 चंद्र राशियों पर प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में गोचर का फल सूर्य राशि से नहीं, बल्कि जन्म की चंद्र राशि से देखा जाता है। शनि इस समय मीन में है — नीचे देखें कि यह प्रत्येक चंद्र राशि से कौन-से भाव में पड़ रहा है और परंपरा में उसका क्या फल कहा गया है।

मेषद्वादश भावकष्टकारी

मेष चंद्र राशि वालों के लिए यह द्वादश भाव में पड़ता है (साढ़े साती, आरंभ चरण), जो व्यय, विश्राम, विदेश यात्रा और त्याग को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

वृषभएकादश भावशुभ

वृषभ चंद्र राशि वालों के लिए यह एकादश भाव में पड़ता है, जो आय, लाभ, मित्र और इच्छापूर्ति को प्रभावित करता है: शनि धैर्य और निरंतर परिश्रम का फल देता है।

मिथुनदशम भावकष्टकारी

मिथुन चंद्र राशि वालों के लिए यह दशम भाव में पड़ता है, जो करियर, प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

कर्कनवम भावकष्टकारी

कर्क चंद्र राशि वालों के लिए यह नवम भाव में पड़ता है, जो भाग्य, धर्म, गुरु और लंबी यात्राएँ को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

सिंहअष्टम भावकष्टकारी

सिंह चंद्र राशि वालों के लिए यह अष्टम भाव में पड़ता है (अष्टम शनि, ढैया), जो उथल-पुथल, साझा धन और आकस्मिक घटनाएँ को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

कन्यासप्तम भावकष्टकारी

कन्या चंद्र राशि वालों के लिए यह सप्तम भाव में पड़ता है, जो विवाह, साझेदारी और दूसरों से व्यवहार को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

तुलाषष्ठ भावशुभ

तुला चंद्र राशि वालों के लिए यह षष्ठ भाव में पड़ता है, जो नौकरी, स्वास्थ्य, प्रतिस्पर्धा और ऋण को प्रभावित करता है: शनि धैर्य और निरंतर परिश्रम का फल देता है।

वृश्चिकपंचम भावकष्टकारी

वृश्चिक चंद्र राशि वालों के लिए यह पंचम भाव में पड़ता है, जो संतान, विद्या, प्रेम और रचनात्मक कार्य को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

धनुचतुर्थ भावकष्टकारी

धनु चंद्र राशि वालों के लिए यह चतुर्थ भाव में पड़ता है (कंटक शनि, ढैया), जो घर, माता, संपत्ति और मानसिक शांति को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

मकरतृतीय भावशुभ

मकर चंद्र राशि वालों के लिए यह तृतीय भाव में पड़ता है, जो साहस, पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँ को प्रभावित करता है: शनि धैर्य और निरंतर परिश्रम का फल देता है।

कुंभद्वितीय भावकष्टकारी

कुंभ चंद्र राशि वालों के लिए यह द्वितीय भाव में पड़ता है (साढ़े साती, अंतिम चरण), जो धन, परिवार और वाणी को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

मीनप्रथम भावकष्टकारी

मीन चंद्र राशि वालों के लिए यह प्रथम भाव में पड़ता है (साढ़े साती, शिखर चरण), जो शरीर, मन और आपकी छवि को प्रभावित करता है: शनि फल में विलंब करता है और अनुशासन माँगता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शनि अभी किस राशि में है?

शनि इस समय मीन राशि में 19°42'53" पर है और वक्री है।

शनि राशि कब बदलेगा?

शनि ३ जून २०२७ को मेष राशि में प्रवेश करेगा।

क्या शनि अभी वक्री है?

हाँ, शनि इस समय वक्री (retrograde) है।

शनि गोचर का मेरी राशि पर क्या प्रभाव है?

गोचर का फल जन्म की चंद्र राशि से देखा जाता है। शनि इस समय मीन में है, इसलिए यह प्रत्येक चंद्र राशि से अलग-अलग भाव में पड़ता है — ऊपर दी गई तालिका में सभी 12 राशियों का फल देखें।

इस समय किन राशियों पर साढ़े साती चल रही है?

शनि के मीन में रहते हुए साढ़े साती उन चंद्र राशियों पर चलती है जिनसे शनि द्वादश, प्रथम या द्वितीय भाव में हो; चतुर्थ और अष्टम भाव में ढैया होती है।