केतु गोचर

संक्षेप में

केतु इस समय सिंह राशि में (वक्री) 5°20'16" पर गोचर कर रहा है। यह ५ दिस॰ २०२६ को कर्क में प्रवेश करेगा।

वर्तमान राशि
सिंह
Degree
5°20'16"
Motion
वक्री
अगला राशि परिवर्तन
कर्क · ५ दिस॰ २०२६

Ketu (the south lunar node) transits backward opposite Rahu, about a year and a half per sign, bringing detachment, introspection and release to the affairs it touches. Where Rahu grasps, Ketu lets go — its transit often coincides with spiritual turns and the quiet dissolving of what has run its course.

आगामी गोचर

केतु कर्क में प्रवेश५ दिस॰ २०२६
केतु मिथुन में प्रवेश२३ जून २०२८
केतु वृषभ में प्रवेश१० जन॰ २०३०

केतु गोचर का सभी 12 चंद्र राशियों पर प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में गोचर का फल सूर्य राशि से नहीं, बल्कि जन्म की चंद्र राशि से देखा जाता है। केतु इस समय सिंह में है — नीचे देखें कि यह प्रत्येक चंद्र राशि से कौन-से भाव में पड़ रहा है और परंपरा में उसका क्या फल कहा गया है।

मेषपंचम भावकष्टकारी

मेष चंद्र राशि वालों के लिए यह पंचम भाव में पड़ता है, जो संतान, विद्या, प्रेम और रचनात्मक कार्य को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

वृषभचतुर्थ भावकष्टकारी

वृषभ चंद्र राशि वालों के लिए यह चतुर्थ भाव में पड़ता है, जो घर, माता, संपत्ति और मानसिक शांति को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

मिथुनतृतीय भावशुभ

मिथुन चंद्र राशि वालों के लिए यह तृतीय भाव में पड़ता है, जो साहस, पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँ को प्रभावित करता है: केतु अनावश्यक को हटा देता है।

कर्कद्वितीय भावकष्टकारी

कर्क चंद्र राशि वालों के लिए यह द्वितीय भाव में पड़ता है, जो धन, परिवार और वाणी को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

सिंहप्रथम भावकष्टकारी

सिंह चंद्र राशि वालों के लिए यह प्रथम भाव में पड़ता है, जो शरीर, मन और आपकी छवि को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

कन्याद्वादश भावकष्टकारी

कन्या चंद्र राशि वालों के लिए यह द्वादश भाव में पड़ता है, जो व्यय, विश्राम, विदेश यात्रा और त्याग को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

तुलाएकादश भावशुभ

तुला चंद्र राशि वालों के लिए यह एकादश भाव में पड़ता है, जो आय, लाभ, मित्र और इच्छापूर्ति को प्रभावित करता है: केतु अनावश्यक को हटा देता है।

वृश्चिकदशम भावकष्टकारी

वृश्चिक चंद्र राशि वालों के लिए यह दशम भाव में पड़ता है, जो करियर, प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

धनुनवम भावकष्टकारी

धनु चंद्र राशि वालों के लिए यह नवम भाव में पड़ता है, जो भाग्य, धर्म, गुरु और लंबी यात्राएँ को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

मकरअष्टम भावकष्टकारी

मकर चंद्र राशि वालों के लिए यह अष्टम भाव में पड़ता है, जो उथल-पुथल, साझा धन और आकस्मिक घटनाएँ को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

कुंभसप्तम भावकष्टकारी

कुंभ चंद्र राशि वालों के लिए यह सप्तम भाव में पड़ता है, जो विवाह, साझेदारी और दूसरों से व्यवहार को प्रभावित करता है: केतु वैराग्य, संशय और पीछे हटने की प्रवृत्ति लाता है।

मीनषष्ठ भावशुभ

मीन चंद्र राशि वालों के लिए यह षष्ठ भाव में पड़ता है, जो नौकरी, स्वास्थ्य, प्रतिस्पर्धा और ऋण को प्रभावित करता है: केतु अनावश्यक को हटा देता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतु अभी किस राशि में है?

केतु इस समय सिंह राशि में 5°20'16" पर है और वक्री है।

केतु राशि कब बदलेगा?

केतु ५ दिस॰ २०२६ को कर्क राशि में प्रवेश करेगा।

क्या केतु अभी वक्री है?

हाँ, केतु इस समय वक्री (retrograde) है।

केतु गोचर का मेरी राशि पर क्या प्रभाव है?

गोचर का फल जन्म की चंद्र राशि से देखा जाता है। केतु इस समय सिंह में है, इसलिए यह प्रत्येक चंद्र राशि से अलग-अलग भाव में पड़ता है — ऊपर दी गई तालिका में सभी 12 राशियों का फल देखें।