चंद्र के उपाय: मंत्र, रत्न, व्रत और दान

संक्षेप में

चंद्र के उपाय सोमवार को किए जाते हैं: “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का जप कीजिए, दूध, चावल का दान कीजिए, और वार-व्रत रखिए। मोती इस ग्रह का रत्न है, पर इसे तभी धारण करना चाहिए जब चंद्र आपके लग्न के लिए कार्येश शुभ सिद्ध हो जाए।

एक नज़र में

वार
सोमवार
देवता
शिव
रंग
सफेद
रत्न
मोती
मोती रत्न
बीज मंत्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः
जप संख्या
11,000 जप
प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ करें

चंद्र के उपाय किसलिए

चंद्र के उपाय मन को स्थिर करते हैं। चंद्रमा भावना, माता, निद्रा और अपने भीतर सहज अनुभव करने का कारक है, और शास्त्रीय उपायों में इसके उपाय सबसे सौम्य हैं — चंद्रमा का कोई पारंपरिक शत्रु नहीं, इसलिए यहां कुछ भी उल्टा पड़ने की आशंका न के बराबर है।

जब ग्रह दबाव में हो

पीड़ित चंद्रमा अतिप्रतिक्रिया, उदासी, कच्ची नींद और भीतर से अस्थिर लगने के रूप में दिखता है। सोमवार का व्रत, शिव आराधना और स्थिर जल के पास समय बिताना इसके सामान्य उत्तर हैं।

चंद्र के अन्य उपाय

मोतीमंत्रवार-व्रतदान

अन्य ग्रहों के उपाय

सूर्यमंगलबुधबृहस्पतिशुक्रशनिराहुकेतु

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या चंद्र के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?

मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये चंद्र को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। मोती ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।

चंद्र के उपायों के लिए कौन-सा वार है?

सोमवार। चंद्र के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।

चंद्र मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?

शास्त्रीय संख्या 11,000 जप है, जो एक साथ नहीं बल्कि सप्ताहों में पूरी की जाती है। प्रतिदिन एक माला — 108 — से आरंभ कीजिए और बढ़ाइए; यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।

मोती किसे नहीं पहनना चाहिए?

अधिकांश कुंडलियों को मोती पहनना ही नहीं चाहिए। यह तभी बताया जाता है जब छाया-ग्रह का दिशानायक बली हो, वह उपचय भाव में हो, और किसी योग्य ज्योतिषी ने विशेष प्रयोजन से इसे कहा हो।