चंद्र का व्रत सोमवार को रखा जाता है — परंपरा से सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन, बिना नमक। निर्बल चंद्र के लिए यह घर-घर का उपाय है, और रत्न के विपरीत यह कुंडली के विरुद्ध नहीं पड़ सकता।
एक नज़र में
वार
सोमवार
देवता
शिव
यह उपाय काम कैसे करता है
वार-व्रत घर-घर का उपाय है — ग्रह के अपने दिन रखा जाता है, प्रायः सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन और नमक का त्याग। यह अनुष्ठान जितना है उतना ही अनुशासन: बात साप्ताहिक संयम की है, इतने समय तक निभाया गया कि उसका अर्थ बने।
सोमवार का व्रत — सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन, बिना नमक — चंद्रमा का शास्त्रीय व्रत है, और पूर्णिमा तथा प्रदोष व्रत भी चंद्र को बल देते हैं।
जब ग्रह दबाव में हो
पीड़ित चंद्रमा अतिप्रतिक्रिया, उदासी, कच्ची नींद और भीतर से अस्थिर लगने के रूप में दिखता है। सोमवार का व्रत, शिव आराधना और स्थिर जल के पास समय बिताना इसके सामान्य उत्तर हैं।
सोमवार। चंद्र के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।
क्या चंद्र के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?
मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये चंद्र को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। मोती ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।