राहु के उपाय शनिवार को किए जाते हैं: “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” का जप कीजिए, कंबल, काले तिल का दान कीजिए, और वार-व्रत रखिए। गोमेद इस ग्रह का रत्न है, पर इसे तभी धारण करना चाहिए जब राहु आपके लग्न के लिए कार्येश शुभ सिद्ध हो जाए।
एक नज़र में
वार
शनिवार (साझा — इस ग्रह का अपना कोई वार नहीं)
देवता
दुर्गा
रंग
गहरा नीला
रत्न
गोमेद
गोमेद रत्न
बीज मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
जप संख्या
18,000 जप
प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ करें
राहु के उपाय किसलिए
राहु के उपाय आसक्ति, व्यसन और उस भूख के लिए हैं जो तृप्त नहीं होती। शास्त्रीय गणना में राहु का अपना कोई दिन या मंदिर नहीं, इसलिए इसके उपाय अनुष्ठान से पहले आचरण के हैं।
जब ग्रह दबाव में हो
पीड़ित राहु चिंता, व्यसन, अपयश और उस पीछा करने के रूप में दिखता है जो पास जाते ही दूर हट जाता है। दुर्गा तथा भैरव की आराधना और ग्रहण-काल का अभ्यास इसका शास्त्रीय उत्तर है।
क्या राहु के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?
मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये राहु को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। गोमेद ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।
राहु के उपायों के लिए कौन-सा वार है?
शनिवार। राहु के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।
राहु मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?
शास्त्रीय संख्या 18,000 जप है, जो एक साथ नहीं बल्कि सप्ताहों में पूरी की जाती है। प्रतिदिन एक माला — 108 — से आरंभ कीजिए और बढ़ाइए; यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।
गोमेद किसे नहीं पहनना चाहिए?
अधिकांश कुंडलियों को गोमेद पहनना ही नहीं चाहिए। यह तभी बताया जाता है जब छाया-ग्रह का दिशानायक बली हो, वह उपचय भाव में हो, और किसी योग्य ज्योतिषी ने विशेष प्रयोजन से इसे कहा हो।