शुक्र के उपाय: मंत्र, रत्न, व्रत और दान

संक्षेप में

शुक्र के उपाय शुक्रवार को किए जाते हैं: “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” का जप कीजिए, चावल, चीनी का दान कीजिए, और वार-व्रत रखिए। हीरा इस ग्रह का रत्न है, पर इसे तभी धारण करना चाहिए जब शुक्र आपके लग्न के लिए कार्येश शुभ सिद्ध हो जाए।

एक नज़र में

वार
शुक्रवार
देवता
लक्ष्मी
रंग
सफेद
रत्न
हीरा
हीरा रत्न
बीज मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
जप संख्या
16,000 जप
प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ करें

शुक्र के उपाय किसलिए

शुक्र के उपाय विवाह, सुख और भोग-सामर्थ्य के लिए हैं — शुक्र साहचर्य और सौष्ठव का कारक है। शुक्रवार का अभ्यास और लक्ष्मी आराधना इनका मूल हैं, और सोलह शुक्रवार का व्रत इनमें सबसे प्रसिद्ध।

जब ग्रह दबाव में हो

निर्बल शुक्र वैवाहिक कठिनाई, भीतर की बेचैन असंतुष्टि और भोग में बहते धन के रूप में दिखता है। उपाय बैंक-बैलेंस नहीं, संबंध को स्थिर करते हैं।

शुक्र के अन्य उपाय

हीरामंत्रवार-व्रतदान

अन्य ग्रहों के उपाय

सूर्यचंद्रमंगलबुधबृहस्पतिशनिराहुकेतु

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शुक्र के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?

मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये शुक्र को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। हीरा ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।

शुक्र के उपायों के लिए कौन-सा वार है?

शुक्रवार। शुक्र के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।

शुक्र मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?

शास्त्रीय संख्या 16,000 जप है, जो एक साथ नहीं बल्कि सप्ताहों में पूरी की जाती है। प्रतिदिन एक माला — 108 — से आरंभ कीजिए और बढ़ाइए; यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।

हीरा किसे नहीं पहनना चाहिए?

हीरा मेष, वृश्चिक, धनु, मीन लग्न को नहीं पहनना चाहिए, जहां वह ग्रह कार्येश पापी है और रत्न ठीक उसी बात को बढ़ाता है जिसे आप सुधारना चाहते थे। जो लग्न अनुकूल सूची में नहीं हैं, उनके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।