राहु का बीज मंत्र है “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”। शास्त्रीय संख्या 18,000 जप है, जो प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ कर सप्ताहों में पूरी की जाती है, और इसका वार शनिवार है।
एक नज़र में
वार
शनिवार (साझा — इस ग्रह का अपना कोई वार नहीं)
देवता
दुर्गा
बीज मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
जप संख्या
18,000 जप
प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ करें
प्रचलित लघु रूप
ॐ रां राहवे नमः
यह उपाय काम कैसे करता है
मंत्र शास्त्रीय उपायों में सबसे सुरक्षित है: आज ही आरंभ किया जा सकता है, इसमें व्यय नहीं, और रत्न की तरह यह कुंडली के विरुद्ध नहीं पड़ता। संख्या — निर्धारित जप-गणना — सप्ताहों में पूरी की जाती है, प्रतिदिन एक माला यानी 108 से आरंभ करके धीरे-धीरे बढ़ाते हुए। यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।
राहु मंत्र शनिवार को जपा जाता है, और ग्रहण के समय सर्वाधिक प्रभावी माना जाता है; इन्हीं पीड़ाओं के लिए दुर्गा सप्तशती भी प्रयोग होती है।
जब ग्रह दबाव में हो
पीड़ित राहु चिंता, व्यसन, अपयश और उस पीछा करने के रूप में दिखता है जो पास जाते ही दूर हट जाता है। दुर्गा तथा भैरव की आराधना और ग्रहण-काल का अभ्यास इसका शास्त्रीय उत्तर है।
शास्त्रीय संख्या 18,000 जप है, जो एक साथ नहीं बल्कि सप्ताहों में पूरी की जाती है। प्रतिदिन एक माला — 108 — से आरंभ कीजिए और बढ़ाइए; यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।
राहु के उपायों के लिए कौन-सा वार है?
शनिवार। राहु के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।
क्या राहु के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?
मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये राहु को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। गोमेद ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।