ईशान में बैठक: यह वास्तु की दृष्टि से उत्तम क्यों है

संक्षेप में

ईशान में बैठक वही स्थान है जो परंपरा मांगती है — यह समझौता नहीं, उत्तम स्थिति है।

दिशा
ईशान
तत्व
जल
दिक्पाल
ईशान (शिव)
ग्रह
बृहस्पति

ईशान में सर्वोत्तम

ईशान बैठक के लिए उसी कारण उपयुक्त है जिस कारण हर हल्की वस्तु के लिए है: यह सबसे संरक्षित और सबसे प्रकाशित कोना है। इसे भरा हुआ न रखें और फ़र्नीचर नीचा रखें।

ईशान किसका है

ईशान कोण पूरे मंडल का सबसे संरक्षित कोना है। यह जल तत्व का है और शिव का, और हर परंपरा एक ही निर्देश पर सहमत है: इसे हल्का, स्वच्छ, खुला और नीचा रखिए। वास्तु के लगभग सभी गंभीर दोष इसी कोने पर भार डालने के किसी न किसी रूप हैं।

बैठक का स्थान कहां

बैठक वह स्थान है जहां घर अतिथियों से मिलता है, इसलिए परंपरा इसे योजना के खुले, प्रकाशवाले भाग में रखती है और केवल कक्ष नहीं, बैठने की व्यवस्था भी देखती है: गृहस्वामी का मुख पूर्व या उत्तर की ओर।

यही कक्ष, अन्य दिशाओं में

बैठकईशानउत्तरपूर्व

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैठक के लिए कौन-सी दिशा सर्वोत्तम है?

ईशान — ईशान बैठक के लिए उसी कारण उपयुक्त है जिस कारण हर हल्की वस्तु के लिए है: यह सबसे संरक्षित और सबसे प्रकाशित कोना है। इसे भरा हुआ न रखें और फ़र्नीचर नीचा रखें।

यदि कोई कक्ष ग़लत स्थान पर है तो क्या भवन दोबारा बनाना पड़ेगा?

नहीं। परंपरा यह मानकर चलती है कि आप रसोई या सीढ़ी नहीं हटा सकते, इसीलिए लगभग हर स्थान-नियम के साथ एक उपाय आता है — प्रायः कक्ष के भीतर का परिवर्तन (चूल्हा कहां है, पलंग किस ओर है, कोने में क्या रखा है), भवन का परिवर्तन नहीं।