पूर्व में बैठक: यह वास्तु की दृष्टि से उत्तम क्यों है

संक्षेप में

पूर्व में बैठक वही स्थान है जो परंपरा मांगती है — यह समझौता नहीं, उत्तम स्थिति है।

दिशा
पूर्व
तत्व
तत्व नहीं, दिक्पाल से पहचानी जाती है
दिक्पाल
इंद्र
ग्रह
सूर्य

पूर्व में सर्वोत्तम

पूर्व बैठक का शास्त्रीय स्थान है, जो पहली धूप लेता है और गृहस्वामी को पूर्वाभिमुख बैठाता है।

पूर्व किसका है

पूर्व इंद्र की दिशा है और सूर्य की: पहली किरण, और वह दिशा जिसकी ओर परंपरा अध्ययन, पूजा और दिन के आरंभ को मोड़ती है। उत्तर की तरह यह भी भार नहीं, खुलापन चाहती है।

बैठक का स्थान कहां

बैठक वह स्थान है जहां घर अतिथियों से मिलता है, इसलिए परंपरा इसे योजना के खुले, प्रकाशवाले भाग में रखती है और केवल कक्ष नहीं, बैठने की व्यवस्था भी देखती है: गृहस्वामी का मुख पूर्व या उत्तर की ओर।

यही कक्ष, अन्य दिशाओं में

बैठकपूर्वउत्तरईशान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैठक के लिए कौन-सी दिशा सर्वोत्तम है?

पूर्व — पूर्व बैठक का शास्त्रीय स्थान है, जो पहली धूप लेता है और गृहस्वामी को पूर्वाभिमुख बैठाता है।

यदि कोई कक्ष ग़लत स्थान पर है तो क्या भवन दोबारा बनाना पड़ेगा?

नहीं। परंपरा यह मानकर चलती है कि आप रसोई या सीढ़ी नहीं हटा सकते, इसीलिए लगभग हर स्थान-नियम के साथ एक उपाय आता है — प्रायः कक्ष के भीतर का परिवर्तन (चूल्हा कहां है, पलंग किस ओर है, कोने में क्या रखा है), भवन का परिवर्तन नहीं।