मंगल व्रत: मंगलवार का उपवास और उसकी विधि

संक्षेप में

मंगल का व्रत मंगलवार को रखा जाता है — परंपरा से सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन, बिना नमक। निर्बल मंगल के लिए यह घर-घर का उपाय है, और रत्न के विपरीत यह कुंडली के विरुद्ध नहीं पड़ सकता।

एक नज़र में

वार
मंगलवार
देवता
हनुमान

यह उपाय काम कैसे करता है

वार-व्रत घर-घर का उपाय है — ग्रह के अपने दिन रखा जाता है, प्रायः सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन और नमक का त्याग। यह अनुष्ठान जितना है उतना ही अनुशासन: बात साप्ताहिक संयम की है, इतने समय तक निभाया गया कि उसका अर्थ बने।

मंगलवार का व्रत गुड़ और भुने चने के साथ, एक बार भोजन, बिना नमक रखा जाता है — और प्रायः हनुमान आराधना के साथ।

जब ग्रह दबाव में हो

निर्बल या पीड़ित मंगल क्रोध, दुर्घटना की प्रवृत्ति, भाइयों से मतभेद और ऐसी अधीरता के रूप में दिखता है जो लाभ से अधिक हानि कराती है। उपायों का उद्देश्य इस ऊर्जा को दबाना नहीं, उसे मार्ग देना है।

मंगल के अन्य उपाय

मूंगामंत्रदानमंगल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल के उपायों के लिए कौन-सा वार है?

मंगलवार। मंगल के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।

क्या मंगल के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?

मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये मंगल को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। मूंगा ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।