वैदिक ज्योतिष में मीन — संभवतः आप कुम्भ हैं

पाश्चात्य: १८ फ़रवरी – १९ मार्च

संक्षेप में

यदि पाश्चात्य ज्योतिष में आप मीन हैं, तो वैदिक ज्योतिष में संभवतः आप कुम्भ (Kumbha) हैं — लगभग 83% मीन ऐसे ही हैं। १८ फ़रवरी – १४ मार्च में जन्मे मीन कुम्भ होते हैं; १५ मार्च – १९ मार्च में जन्मे मीन ही रहते हैं। दोनों राशिचक्र अलग-अलग बिंदुओं से नापे जाते हैं और लगभग २४ अंश दूर हैं।

वैदिक ज्योतिष में मीन क्या बनती है

जन्म तिथिवैदिक राशि
१८ फ़रवरी – १४ मार्च83%कुम्भ(Kumbha)
१५ मार्च – १९ मार्च17%मीन(Meena)

संधि की तिथियाँ वर्ष के अनुसार लगभग एक दिन आगे-पीछे होती हैं, इसलिए यदि आपका जन्म संधि के एक-दो दिन के भीतर हुआ हो तो ऊपर दिए कैलकुलेटर का उपयोग करें।

अपनी वैदिक राशि जानें

अपनी जन्म तिथि भरें। यदि आपका जन्म राशि-संधि के आसपास हुआ हो तो समय भी जोड़ें — कुछ घंटे उत्तर बदल सकते हैं।

पर वैदिक ज्योतिष सूर्य राशि को प्रमुख नहीं मानता

उतनी नहीं जितनी आप सोचते हैं। वैदिक ज्योतिष सूर्य के बजाय चंद्र राशि और लग्न को प्रमुख मानता है, और इन दोनों के लिए जन्म तिथि के साथ जन्म समय भी चाहिए।

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अन्य राशियाँ

मेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुम्भ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैदिक ज्योतिष में मीन कौन-सी राशि है?

अधिकांश मीन — लगभग 83% — वैदिक ज्योतिष में कुम्भ (Kumbha) होते हैं, क्योंकि निरयण राशिचक्र पाश्चात्य सायन राशिचक्र से लगभग २४ अंश पीछे चलता है।

कौन-सी मीन तिथियाँ वैदिक ज्योतिष में भी मीन रहती हैं?

१८ फ़रवरी – १४ मार्च में जन्मे मीन वैदिक ज्योतिष में कुम्भ होते हैं, और १५ मार्च – १९ मार्च में जन्मे मीन। जन्म वर्ष के अनुसार यह संधि लगभग एक दिन खिसकती है।

मेरी वैदिक राशि पाश्चात्य राशि से अलग क्यों है?

पाश्चात्य ज्योतिष राशिचक्र को मार्च विषुव से नापता है; वैदिक ज्योतिष स्थिर नक्षत्रों से। विषुव नक्षत्रों की तुलना में हर ७२ वर्ष में लगभग एक अंश खिसकता है, और यह अंतर अब लगभग 24.2 अंश है — लगभग पूरी एक राशि।

क्या दोनों में से कोई एक पद्धति ग़लत है?

कोई भी भूल नहीं है। ये नापने की दो अलग परंपराएँ हैं, दोनों अपने भीतर संगत हैं और दोनों की अपनी व्याख्या-परंपरा है। राशियाँ इसलिए अलग हैं क्योंकि आरंभ बिंदु अलग हैं, इसलिए नहीं कि किसी की गणना ग़लत है।

क्या मेरी वैदिक सूर्य राशि उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी पाश्चात्य?

उतनी नहीं जितनी आप सोचते हैं। वैदिक ज्योतिष सूर्य के बजाय चंद्र राशि और लग्न को प्रमुख मानता है, और इन दोनों के लिए जन्म तिथि के साथ जन्म समय भी चाहिए।