ईशान में मुख्य शयनकक्ष: दोष क्या है और उपाय क्या

संक्षेप में

ईशान में मुख्य शयनकक्ष वह स्थान है जिसे परंपरा टालती है। यह वह भी है जिसे अधिकांश लोग बदल नहीं सकते, इसलिए महत्व निर्णय का नहीं, नीचे दिए उपाय का है।

दिशा
ईशान
तत्व
जल
दिक्पाल
ईशान (शिव)
ग्रह
बृहस्पति

यदि इसे हटाया न जा सके

ईशान में मुख्य शयनकक्ष सबसे संरक्षित कोने पर स्थायी भार डालता है, जिसे परंपरा वास्तविक दोष मानती है। उपाय हैं — पलंग को कक्ष के नैऋत्य में ले जाना, कक्ष का ईशान खुला और नीचा रखना, और यदि दूसरा शयनकक्ष हो तो इसका प्रयोग सीमित रखना।

ईशान किसका है

ईशान कोण पूरे मंडल का सबसे संरक्षित कोना है। यह जल तत्व का है और शिव का, और हर परंपरा एक ही निर्देश पर सहमत है: इसे हल्का, स्वच्छ, खुला और नीचा रखिए। वास्तु के लगभग सभी गंभीर दोष इसी कोने पर भार डालने के किसी न किसी रूप हैं।

मुख्य शयनकक्ष का स्थान कहां

मुख्य शयनकक्ष घर के सबसे भारी और सबसे स्थिर भाग में होना चाहिए, इस मान्यता पर कि जो व्यक्ति गृहस्थी का भार उठाता है उसे वहीं सोना चाहिए जहां भवन सबसे अधिक स्थिर है। यह ऊर्जा नहीं, स्थिरता का प्रश्न है।

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यही कक्ष, अन्य दिशाओं में

मुख्य शयनकक्षईशाननैऋत्यपश्चिम
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईशान में मुख्य शयनकक्ष का उपाय क्या है?

ईशान में मुख्य शयनकक्ष सबसे संरक्षित कोने पर स्थायी भार डालता है, जिसे परंपरा वास्तविक दोष मानती है। उपाय हैं — पलंग को कक्ष के नैऋत्य में ले जाना, कक्ष का ईशान खुला और नीचा रखना, और यदि दूसरा शयनकक्ष हो तो इसका प्रयोग सीमित रखना।

यदि कोई कक्ष ग़लत स्थान पर है तो क्या भवन दोबारा बनाना पड़ेगा?

नहीं। परंपरा यह मानकर चलती है कि आप रसोई या सीढ़ी नहीं हटा सकते, इसीलिए लगभग हर स्थान-नियम के साथ एक उपाय आता है — प्रायः कक्ष के भीतर का परिवर्तन (चूल्हा कहां है, पलंग किस ओर है, कोने में क्या रखा है), भवन का परिवर्तन नहीं।