सूर्य का बीज मंत्र है “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”। शास्त्रीय संख्या 7,000 जप है, जो प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ कर सप्ताहों में पूरी की जाती है, और इसका वार रविवार है।
एक नज़र में
वार
रविवार
देवता
सूर्य
बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
जप संख्या
7,000 जप
प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ करें
यह उपाय काम कैसे करता है
मंत्र शास्त्रीय उपायों में सबसे सुरक्षित है: आज ही आरंभ किया जा सकता है, इसमें व्यय नहीं, और रत्न की तरह यह कुंडली के विरुद्ध नहीं पड़ता। संख्या — निर्धारित जप-गणना — सप्ताहों में पूरी की जाती है, प्रतिदिन एक माला यानी 108 से आरंभ करके धीरे-धीरे बढ़ाते हुए। यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।
सूर्य मंत्र सूर्योदय के समय पूर्वाभिमुख होकर जपा जाता है, परंपरा से जल अर्पित करते हुए — साथ का अर्घ्य आधा उपाय है।
जब ग्रह दबाव में हो
ग्रंथ निर्बल सूर्य को आत्मविश्वास की कमी, ऊर्जा का अभाव और अधिकार-पक्ष तथा पिता से टकराव के रूप में बताते हैं। ये अभ्यास इसी स्थिति के लिए हैं।
शास्त्रीय संख्या 7,000 जप है, जो एक साथ नहीं बल्कि सप्ताहों में पूरी की जाती है। प्रतिदिन एक माला — 108 — से आरंभ कीजिए और बढ़ाइए; यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।
सूर्य के उपायों के लिए कौन-सा वार है?
रविवार। सूर्य के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।
क्या सूर्य के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?
मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये सूर्य को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। माणिक्य ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।