शनि का बीज मंत्र है “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः”। शास्त्रीय संख्या 23,000 जप है, जो प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ कर सप्ताहों में पूरी की जाती है, और इसका वार शनिवार है।
एक नज़र में
वार
शनिवार
देवता
हनुमान
बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
जप संख्या
23,000 जप
प्रतिदिन एक माला (108) से आरंभ करें
प्रचलित लघु रूप
ॐ शं शनैश्चराय नमः
यह उपाय काम कैसे करता है
मंत्र शास्त्रीय उपायों में सबसे सुरक्षित है: आज ही आरंभ किया जा सकता है, इसमें व्यय नहीं, और रत्न की तरह यह कुंडली के विरुद्ध नहीं पड़ता। संख्या — निर्धारित जप-गणना — सप्ताहों में पूरी की जाती है, प्रतिदिन एक माला यानी 108 से आरंभ करके धीरे-धीरे बढ़ाते हुए। यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।
शनि मंत्र शनिवार को जपा जाता है; साढ़ेसाती के दौरान दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ पारंपरिक विधान है।
जब ग्रह दबाव में हो
कठिन शनि विलंब, एकाकीपन, दीर्घकालिक तनाव और इस अनुभव के रूप में दिखता है कि परिश्रम फल में नहीं बदल रहा। शनिवार को वृद्धों तथा श्रमिकों की सेवा और हनुमान आराधना इसका शास्त्रीय उत्तर है।
शास्त्रीय संख्या 23,000 जप है, जो एक साथ नहीं बल्कि सप्ताहों में पूरी की जाती है। प्रतिदिन एक माला — 108 — से आरंभ कीजिए और बढ़ाइए; यहां गणित से अधिक भाव का महत्व है।
शनि के उपायों के लिए कौन-सा वार है?
शनिवार। शनि के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।
क्या शनि के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?
मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये शनि को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। नीलम ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।