अपने आसपास की दुनिया को समझने की एक गहरी आवश्यकता आपमें रहती है। आपके आदर्श ऊँचे होते हैं और आपकी नज़र हमेशा क्षितिज पर जो कुछ है, उस पर टिकी रहती है। आपको अपने ज्ञान और अपने नैतिक मूल्यों पर गर्व होता है।
अध्ययन एवं दर्शन: सीखने की आपकी प्यास कक्षा की चारदीवारी से कहीं आगे तक फैली होती है। आप विभिन्न संस्कृतियों के लोगों से या विदेशी भूमि पर बहुत कुछ सीखते हैं। भाषाओं के प्रति आपमें स्वाभाविक रुझान होने की संभावना है। यह भी संभव है कि आप एक से अधिक शैक्षणिक डिग्रियाँ प्राप्त करें और एक शिक्षक के रूप में कार्य करें।
संबंध एवं प्रज्ञा: दूसरों के जीवन को छूकर आप यह समझने लगते हैं कि सभी लोग आपस में जुड़े हुए हैं। पूर्वाग्रह और संकीर्णता पर विजय पाने के लिए अपनी प्रज्ञा को दूसरों के साथ बाँटें।
सावधानी: अपना ज्ञान बाँटने के उत्साह में आत्म-धार्मिकता (स्वयं को श्रेष्ठ समझने की प्रवृत्ति) से बचें।
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