वायव्य में रसोई: यह वास्तु की दृष्टि से उत्तम क्यों है

संक्षेप में

वायव्य में रसोई वही स्थान है जो परंपरा मांगती है — यह समझौता नहीं, उत्तम स्थिति है।

दिशा
वायव्य
तत्व
वायु
दिक्पाल
वायु
ग्रह
चंद्र

वायव्य में सर्वोत्तम

वायव्य रसोई का स्वीकृत दूसरा स्थान है, और अधिकांश आधुनिक फ़्लैटों में यही मिलता है। वायु अग्नि को पोषित करती है, इसलिए परंपरा इसे व्यवहार्य मानती है — जहां संभव हो वहां पकाते समय मुख पूर्व की ओर रखते हुए।

वायव्य किसका है

वायव्य कोण वायु का कोना है: गति, संचार, आना-जाना। अतिथि, अस्थायी भंडारण और उपयोगिता-कक्ष यहां सहज बैठते हैं, और जो स्थायी होना चाहिए वह नहीं।

रसोई का स्थान कहां

रसोई अग्नि है, और अग्नि का एक कोना है। सभी कक्षों में यही वह है जिस पर परंपरा सबसे कम विभाजित और सबसे अधिक स्पष्ट है, और इसीलिए ग़लत कोने में बनी रसोई वह दोष है जिसका उपाय सबसे अधिक पूछा जाता है।

यही कक्ष, अन्य दिशाओं में

रसोईवायव्यआग्नेय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रसोई के लिए कौन-सी दिशा सर्वोत्तम है?

वायव्य — वायव्य रसोई का स्वीकृत दूसरा स्थान है, और अधिकांश आधुनिक फ़्लैटों में यही मिलता है। वायु अग्नि को पोषित करती है, इसलिए परंपरा इसे व्यवहार्य मानती है — जहां संभव हो वहां पकाते समय मुख पूर्व की ओर रखते हुए।

यदि कोई कक्ष ग़लत स्थान पर है तो क्या भवन दोबारा बनाना पड़ेगा?

नहीं। परंपरा यह मानकर चलती है कि आप रसोई या सीढ़ी नहीं हटा सकते, इसीलिए लगभग हर स्थान-नियम के साथ एक उपाय आता है — प्रायः कक्ष के भीतर का परिवर्तन (चूल्हा कहां है, पलंग किस ओर है, कोने में क्या रखा है), भवन का परिवर्तन नहीं।