केतु का दान: क्या दें और किसे दें

संक्षेप में

केतु का दान मंगलवार को दिया जाता है: रंग-बिरंगा वस्त्र, काले तिल, सरसों का तेल, कुत्तों को भोजन। दान ग्रह को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करता है, इसीलिए जहां रत्न रोका जाता है वहां दान बताया जाता है।

एक नज़र में

वार
मंगलवार (साझा — इस ग्रह का अपना कोई वार नहीं)
देवता
गणेश
दान
रंग-बिरंगा वस्त्र, काले तिल, सरसों का तेल, कुत्तों को भोजन

यह उपाय काम कैसे करता है

दान किसी विशेष ग्रह के निमित्त, उसके दिन, और उसके कारकत्व से मिलाकर दिया जाता है। शास्त्रीय दृष्टि से यह वह उपाय है जो तब काम आता है जब रत्न संकटपूर्ण हो — यह ग्रह को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करता है, इसीलिए राहु और शनि के लिए, जहां रत्न रोका जाता है, दान बताया जाता है।

केतु का दान रंग-बिरंगा वस्त्र, तिल और कंबल है जो साधुओं को दिए जाते हैं, तथा कुत्तों को भोजन — वह प्राणी जो परंपरा से भैरव को प्रिय है।

जब ग्रह दबाव में हो

पीड़ित केतु रुचि के अचानक समाप्त होने, दिशा को लेकर भ्रम और अपने ही बनाए हुए से हट जाने के रूप में दिखता है। गणेश तथा भैरव आराधना, कुत्तों को भोजन और नियमित साधना इसका शास्त्रीय उत्तर है।

केतु के अन्य उपाय

लहसुनियामंत्रवार-व्रतकेतु

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतु के उपायों के लिए कौन-सा वार है?

मंगलवार। केतु के व्रत, दान और मंत्र जप सभी इसी वार के हैं।

क्या केतु के उपाय ज्योतिषी के बिना आरंभ किए जा सकते हैं?

मंत्र, वार-व्रत और दान किसी के लिए भी सुरक्षित हैं — ये केतु को बढ़ाए बिना उसे संबोधित करते हैं। लहसुनिया ऐसा नहीं है: ग्रह-रत्न वही बढ़ाता है जो ग्रह पहले से कर रहा है, इसलिए उसके लिए पहले कुंडली देखना आवश्यक है।