पोंगल 2027 in श्रीनगर

१५ जन॰ २०२७ – १७ जन॰ २०२७· 141 दिन बाद

संक्षेप में

श्रीनगर में पोंगल 2027 शुक्रवार, १५ जनवरी २०२७ को है। यह त्योहार १५ जन॰ २०२७ – १७ जन॰ २०२७ तक चलता है। सूर्योदय ७:३७ am और सूर्यास्त ५:४२ pm पर है।

भारत के समान दिन

अन्य नाम: थाई पोंगल · भोगी · मट्टू पोंगल · कानुम पोंगल

श्रीनगर का समय

तिथि
शुक्रवार, १५ जनवरी २०२७
शुक्रवार
अवधि
3 दिन
१५ जन॰ २०२७ – १७ जन॰ २०२७
सूर्योदय
७:३७ am
सूर्यास्त
५:४२ pm
चंद्रोदय
११:२२ am

श्रीनगर में शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त१२:१९ pm – १:०० pm
राहु काल — त्याज्य११:२४ am – १२:४० pm

इस त्योहार के लिए परंपरा में अलग मुहूर्त नहीं है — यह पूरे दिन मनाया जाता है। अभिजित उस दिन का सामान्य शुभ समय है और राहु काल त्याज्य।

श्रीनगर का आज का पंचांग

पोंगल क्या है?

पोंगल तमिलनाडु का चार दिवसीय फसल पर्व है, जो थाई मास का आरंभ करता है — परंपरा जिसे वर्ष का सबसे शुभ मास मानती है (“थाई पिरन्दाल वऴि पिरक्कुम” — थाई आते ही राह निकलती है)। थाई पोंगल वही सौर क्षण है जो मकर संक्रांति है, यानी सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, इसीलिए यह चंद्र पर्वों की तरह भटकने के बजाय 14 या 15 जनवरी पर टिका रहता है।

कैसे मनाया जाता है

इसकी पूर्वसंध्या भोगी है, जब पुराना सामान जलाकर घर खाली किया जाता है। थाई पोंगल के दिन मिट्टी के बर्तन में नए गुड़ के साथ चावल तब तक पकाया जाता है जब तक वह उबलकर किनारों से बाहर न छलक जाए — उसी क्षण घर भर “पोंगलो पोंगल” पुकार उठता है। मट्टू पोंगल हल जोतने वाले बैलों के नाम है, और कानुम पोंगल स्वजनों से मिलने में बीतता है।

अन्य शहर

आगराअमदाबादअजमेरअलीगढ़अमरावतीअमृतसरआसनसोलऔरंगाबादबैंगलोरबरेलीभावनगरभोपाल

अन्य वर्ष

पोंगल 2025पोंगल 2026पोंगल 2028पोंगल 2029

अन्य त्योहार

मकर संक्रांतिवसंत पंचमीमहा शिवरात्रिहोलिका दहनहोलीउगादि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में पोंगल 2027 कब है?

श्रीनगर में पोंगल 2027 शुक्रवार, १५ जनवरी २०२७ को है।

पोंगल 2027 कितने दिन चलता है?

पोंगल 2027 3 दिन चलता है, १५ जन॰ २०२७ – १७ जन॰ २०२७ तक।

क्या श्रीनगर में पोंगल 2027 भारत के समान दिन है?

हाँ। इस वर्ष पोंगल श्रीनगर और भारत दोनों में १५ जन॰ २०२७ को है, यद्यपि पूजा का समय अलग है क्योंकि सूर्योदय और चंद्रोदय स्थानीय होते हैं।

पोंगल को और किन नामों से जाना जाता है?

पोंगल को थाई पोंगल, भोगी, मट्टू पोंगल, कानुम पोंगल भी कहा जाता है। ये एक ही त्योहार के क्षेत्रीय नाम और वर्तनियाँ हैं।