गोवर्धन पूजा 2029 in श्रीनगर

मंगलवार, ६ नवंबर २०२९· 1167 दिन बाद

संक्षेप में

श्रीनगर में गोवर्धन पूजा 2029 मंगलवार, ६ नवंबर २०२९ को है। पंचांग के अनुसार यह कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा है। पूजा मुहूर्त ९:५४ am – ६:०८ am है। सूर्योदय ६:५६ am और सूर्यास्त ५:३२ pm पर है।

भारत के समान दिन

अन्य नाम: अन्नकूट · पड़वा · बलि प्रतिपदा

श्रीनगर का समय

तिथि
मंगलवार, ६ नवंबर २०२९
मंगलवार
पंचांग तिथि
कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा
सूर्योदय
६:५६ am
सूर्यास्त
५:३२ pm
चंद्रोदय
६:५८ am
चंद्रास्त
५:२८ pm

श्रीनगर में शुभ मुहूर्त

पूजा मुहूर्त९:५४ am – ६:०८ am७ नव॰ २०२९
सायंकाल पूजा मुहूर्त३:२५ pm – ५:३२ pm
अभिजित मुहूर्त११:५२ am – १२:३५ pm
राहु काल — त्याज्य२:५३ pm – ४:१२ pm

ये समय इसी शहर के लिए गणना किए गए हैं — कौन-सा मुहूर्त मान्य है यह तिथि तय करती है, इसलिए ये स्थान के अनुसार बदलते हैं और भारत के समय नहीं हैं। अभिजित और राहु काल त्योहार के नहीं, उस दिन के होते हैं।

श्रीनगर का आज का पंचांग

गोवर्धन पूजा क्या है?

गोवर्धन पूजा उस प्रसंग की स्मृति है जब कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रज को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अंगुली की नोक पर उठा लिया था। यह दीपावली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को पड़ती है।

कैसे मनाया जाता है

भगवान के समक्ष अन्नकूट — “अन्न का पर्वत” — सजाया जाता है और फिर सबमें बांटा जाता है। गुजरात में यही दिन नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।

अन्य शहर

आगराअमदाबादअजमेरअलीगढ़अमरावतीअमृतसरआसनसोलऔरंगाबादबैंगलोरबरेलीभावनगरभोपाल

अन्य वर्ष

गोवर्धन पूजा 2027गोवर्धन पूजा 2028

अन्य त्योहार

नरक चतुर्दशीदिवालीभाई दूजधनतेरसछठ पूजाकरवा चौथ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में गोवर्धन पूजा 2029 कब है?

श्रीनगर में गोवर्धन पूजा 2029 मंगलवार, ६ नवंबर २०२९ को है। पंचांग के अनुसार यह कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा है।

श्रीनगर में गोवर्धन पूजा का पूजा मुहूर्त कब है?

श्रीनगर में ६ नव॰ २०२९ को पूजा मुहूर्त ९:५४ am – ६:०८ am है। मुख्य पूजा इसी अवधि में की जाती है।

क्या श्रीनगर में गोवर्धन पूजा 2029 भारत के समान दिन है?

हाँ। इस वर्ष गोवर्धन पूजा श्रीनगर और भारत दोनों में ६ नव॰ २०२९ को है, यद्यपि पूजा का समय अलग है क्योंकि सूर्योदय और चंद्रोदय स्थानीय होते हैं।

गोवर्धन पूजा को और किन नामों से जाना जाता है?

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट, पड़वा, बलि प्रतिपदा भी कहा जाता है। ये एक ही त्योहार के क्षेत्रीय नाम और वर्तनियाँ हैं।